
वानर
सुग्रीव
किष्किन्धा के राजा
अग्नि को साक्षी मानकर मैत्री करते हैं, अपना राज्य वापस पाते हैं, और फिर वचन भूल जाते हैं — जब तक क्रुद्ध लक्ष्मण द्वार पर नहीं आ जाते।
- प्रथम उल्लेख
- किष्किन्धाकाण्ड 5

किष्किन्धा के राजा
अग्नि को साक्षी मानकर मैत्री करते हैं, अपना राज्य वापस पाते हैं, और फिर वचन भूल जाते हैं — जब तक क्रुद्ध लक्ष्मण द्वार पर नहीं आ जाते।