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Nakshatras

29 शब्दप्रत्येक शब्द की परिभाषा यहाँ है। जिन पर अधिक कहने योग्य है वे अपने पृष्ठ से जुड़े हैं।

  • राशिचक्र के 27 समान खंडों में से एक, प्रत्येक 13°20′ चौड़ा, स्थिर तारों के सापेक्ष नापा गया। भारतीय खगोल में नक्षत्र बारह राशियों से प्राचीन हैं और सूक्ष्म जाल हैं: जन्म के समय चंद्र का नक्षत्र विंशोत्तरी दशा-क्रम निर्धारित करता है, और परंपरागत मेलापक तथा मुहूर्त वस्तुतः नक्षत्र से ही चलते हैं।

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  • अश्विनी

    aśvinī

    27 में से 1वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 0°00′–13°20′। प्रतीक और देवता: अश्व-मुख; अश्विनीकुमार, देवताओं के वैद्य। विंशोत्तरी दशा स्वामी केतु।

  • भरणी

    bharaṇī

    27 में से 2वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 13°20′–26°40′। प्रतीक और देवता: योनि; यम, जो ले जाते हैं। विंशोत्तरी दशा स्वामी शुक्र।

  • कृत्तिका

    kṛttikā

    27 में से 3वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 26°40′–40°00′। प्रतीक और देवता: शस्त्र या ज्वाला; अग्नि। कृत्तिका तारापुंज। विंशोत्तरी दशा स्वामी सूर्य।

  • रोहिणी

    rohiṇī

    27 में से 4वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 40°00′–53°20′। प्रतीक और देवता: शकट; ब्रह्मा। रोहिणी तारा। विंशोत्तरी दशा स्वामी चंद्र।

  • मृगशिरा

    mṛgaśira

    27 में से 5वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 53°20′–66°40′। प्रतीक और देवता: मृग-शीर्ष; सोम। मृगशिरा। विंशोत्तरी दशा स्वामी मंगल।

  • आर्द्रा

    ārdrā

    27 में से 6वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 66°40′–80°00′। प्रतीक और देवता: अश्रु-बिंदु; रुद्र। आर्द्रा तारा। विंशोत्तरी दशा स्वामी राहु।

  • पुनर्वसु

    punarvasu

    27 में से 7वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 80°00′–93°20′। प्रतीक और देवता: बाणों का तरकश; अदिति। पुनरागमन। विंशोत्तरी दशा स्वामी गुरु।

  • पुष्य

    puṣya

    27 में से 8वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 93°20′–106°40′। प्रतीक और देवता: गौ-स्तन या कमल; बृहस्पति। पोषण। विंशोत्तरी दशा स्वामी शनि।

  • आश्लेषा

    āśleṣā

    27 में से 9वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 106°40′–120°00′। प्रतीक और देवता: कुंडलित सर्प; नाग। आलिंगन। विंशोत्तरी दशा स्वामी बुध।

  • मघा

    maghā

    27 में से 10वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 120°00′–133°20′। प्रतीक और देवता: राज-सिंहासन; पितर। मघा तारा। विंशोत्तरी दशा स्वामी केतु।

  • पूर्वा फाल्गुनी

    pūrvā phalgunī

    27 में से 11वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 133°20′–146°40′। प्रतीक और देवता: शय्या का अग्र भाग; भग। विश्राम और सुख। विंशोत्तरी दशा स्वामी शुक्र।

  • उत्तरा फाल्गुनी

    uttarā phalgunī

    27 में से 12वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 146°40′–160°00′। प्रतीक और देवता: शय्या का पश्च भाग; अर्यमन्। आश्रय। विंशोत्तरी दशा स्वामी सूर्य।

  • हस्त

    hasta

    27 में से 13वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 160°00′–173°20′। प्रतीक और देवता: खुला हाथ; सवितृ। कौशल। विंशोत्तरी दशा स्वामी चंद्र।

  • चित्रा

    citrā

    27 में से 14वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 173°20′–186°40′। प्रतीक और देवता: उज्ज्वल रत्न; त्वष्टा। चित्रा तारा। विंशोत्तरी दशा स्वामी मंगल।

  • स्वाति

    svāti

    27 में से 15वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 186°40′–200°00′। प्रतीक और देवता: वायु में तरु-अंकुर; वायु। स्वाति तारा। विंशोत्तरी दशा स्वामी राहु।

  • विशाखा

    viśākhā

    27 में से 16वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 200°00′–213°20′। प्रतीक और देवता: विजय-तोरण; इंद्राग्नि। विंशोत्तरी दशा स्वामी गुरु।

  • अनुराधा

    anurādhā

    27 में से 17वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 213°20′–226°40′। प्रतीक और देवता: कमल; मित्र। मैत्री और भक्ति। विंशोत्तरी दशा स्वामी शनि।

  • ज्येष्ठा

    jyeṣṭhā

    27 में से 18वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 226°40′–240°00′। प्रतीक और देवता: कुंडल या छत्र; इंद्र। ज्येष्ठा तारा। विंशोत्तरी दशा स्वामी बुध।

  • मूल

    mūla

    27 में से 19वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 240°00′–253°20′। प्रतीक और देवता: जड़ों का गुच्छ; निरृति। मूल और उन्मूलन। विंशोत्तरी दशा स्वामी केतु।

  • पूर्वाषाढ़ा

    pūrvāṣāḍhā

    27 में से 20वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 253°20′–266°40′। प्रतीक और देवता: हस्ति-दंत या पंखा; आप:, जल। विंशोत्तरी दशा स्वामी शुक्र।

  • उत्तराषाढ़ा

    uttarāṣāḍhā

    27 में से 21वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 266°40′–280°00′। प्रतीक और देवता: हस्ति-दंत; विश्वेदेवा। अखंड विजय। विंशोत्तरी दशा स्वामी सूर्य।

  • श्रवण

    śravaṇa

    27 में से 22वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 280°00′–293°20′। प्रतीक और देवता: कान या तीन पद-चिह्न; विष्णु। श्रवण। विंशोत्तरी दशा स्वामी चंद्र।

  • धनिष्ठा

    dhaniṣṭhā

    27 में से 23वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 293°20′–306°40′। प्रतीक और देवता: मृदंग; वसु। लय और संपदा। विंशोत्तरी दशा स्वामी मंगल।

  • शतभिषा

    śatabhiṣā

    27 में से 24वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 306°40′–320°00′। प्रतीक और देवता: रिक्त वृत्त; वरुण। नाम का अर्थ "सौ वैद्य"। विंशोत्तरी दशा स्वामी राहु।

  • पूर्वा भाद्रपदा

    pūrvā bhādrapadā

    27 में से 25वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 320°00′–333°20′। प्रतीक और देवता: शव-शय्या का अग्र भाग; अज एकपाद। विंशोत्तरी दशा स्वामी गुरु।

  • उत्तरा भाद्रपदा

    uttarā bhādrapadā

    27 में से 26वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 333°20′–346°40′। प्रतीक और देवता: शव-शय्या का पश्च भाग; अहिर्बुध्न्य। विंशोत्तरी दशा स्वामी शनि।

  • रेवती

    revatī

    27 में से 27वाँ नक्षत्र, निरयन राशिचक्र का 346°40′–360°00′। प्रतीक और देवता: काल-मापक मृदंग; पूषन्, यात्रियों के रक्षक। विंशोत्तरी दशा स्वामी बुध।

  • पाद

    pāda

    नक्षत्र का चौथाई भाग, 3°20′ चौड़ा। 27 नक्षत्र × 4 पाद = 108 पाद, और प्रत्येक पाद एक नवमांश राशि से मिलता है — इसी से D9 कुंडली निकलती है। पाद वही स्थान है जहाँ जन्म-समय की छोटी त्रुटि पाठ बदल देती है।